सफलता का ही सम्मान क्यों , अनुभव का क्यों नहीं | Reasons Why Experience Is Important In Hindi ?

क्या समाज तपस्या का नहीं , सिर्फ परिणाम का सम्मान करना जानता हैं ? क्या बिना प्रयास सफलता प्राप्त की जा सकती है ? क्या अनुभव का कोई मूल्य नहीं होता हैं ( Reasons Why Experience Is Important In Hindi ) , 

अनेक व्यक्ति सिर पर सपनों की टोकरी लेकर उनकों पूर्ण करने हेतु लक्ष्य प्राप्ति की तपस्या में लग जाते हैं।
इस सफ़र में कुछ की तपस्या पूर्ण हो जाती है तो कुछ की तपस्या की लौ लक्ष्य प्राप्ति करने से पहले ही मंद पड़ जाती हैं या कहें कि लक्ष्य प्राप्ति तक प्रज्जवलित नही रह पाती है। जिनकी तपस्या लक्ष्य प्राप्त करने में सफल हो जाती है उनके प्रति समाज का व्यवहार तथा नज़रिया भी बदल जाता हैं; और असफल या प्रयासरत व्यक्तियों को वो सम्मान नही मिल पाता जिसके वो शायद हकदार हो।

एक विजेता को सम्मान देना आवश्यक हैं परंतु एक ऐसे व्यक्ति को भी सम्मान देना आवश्यक होता है जो सफ़ल न हो पाया हो परंतु जो यात्रा का यात्री अवश्य रहा हो ।

वो समाज के उन व्यक्तियों से तो श्रेष्ठ ही है जो केवल योजना बनाते रहते है परंतु उस योजना पर कभी चलने का साहस ही नही कर पाते हैं। जब कोई व्यक्ति कुछ बड़ा करने की या कुछ ऐसा करने की सोचता है , जो समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग केवल इसलिए नही कर पाता है कि या तो उनमें जोख़िम लेने का साहस नही होता या वो अपनी आरामदायक स्तिथि से समझौता नही करना चाहते हैं।

अब समाज इनमें से किसे श्रेष्ठ कहेगा उसे जो अपनी आरामदायक स्थिति से जीवनभर समझौता नही करना चाहता हैं या उसे जिसको अनेक कष्ट सहना मंजूर है परंतु एक ही स्तर पर बने रहना मंजूर नहीं ? या जो जीवन में कुछ नया अनुभव करने या कुछ नया प्राप्त करने के लिए अपना सर्वस्व दाव पर लगाने से भी नहीं डरता हो।

हमको समझना होगा कि अगर पानी भी एक ही जगह पड़ा रहे तो उसमें भी कीड़े पड़ जाते हैं। अतः पानी का परिवर्तन चक्र सक्रिय बने रहना या पानी का गतिशील बने रहना ही आवश्यक होता हैं। इसी प्रकार समाज भी एक गतिशील इकाई हैं।

अतः इसमें भी परिवर्तन अपेक्षित होता हैं ; और इसमें परिवर्तन तभी आएगा जब समाज की इकाईयों या संस्थाओ में परिवर्तन आएगा । व्यक्ति भी समाज की अहम इकाइयों में से एक हैं । व्यक्ति जब आगे बढ़ेगा तो समाज भी आगे बढ़ेगा या कहे कि जब समाज आगे बढ़ेगा तो व्यक्ति भी आगे बढ़ेगा । इसप्रकार हम कह सकते है कि समाज और व्यक्ति एक दूसरे से एक कड़ी के रूप में जुड़े हुए होते हैं।

अब यदि किसी समाज मे व्यक्ति कभी कुछ नया प्राप्त करने की कोशिश ही न करें तो आखिर कैसे किसी समाज मे परिवर्तन आएगा । अगर व्यक्ति ने कुछ नया करने या कुछ अलग पाने या कुछ बड़ा करने का साहस ही न किया होता तो शायद समाज ने आज आदिमानव की स्तिथि में ही जीवन व्यतीत कर रहा होता । समाज में उन व्यक्तियों का तो विशेष योगदान होता ही है ; जिन्होंने सफलता प्राप्त करके समाज मे अभूतपूर्ण परिवर्तन करने का काम किया है परन्तु साथ मे उन व्यक्तियों का भी विशेष योगदान है; जो सफल न हो पाए परंतु जिन्होंने कोशिश अवश्य की हैं।

क्योकि सही मायने में समाज को लड़ना , खड़ा होना , किसी भी परिस्थिति में अड़े रहना , सही से वही व्यक्ति सीखा जाते है; जो अनेक बार असफल होने पर भी बार बार प्रयास करते रहते हैं।

और कभी न कभी ये सफल जरूर होते है यदि किसी कारणवश ये असफल हो भी जाते है तो भी समाज को इनसे बेहतर मार्गदर्शक शायद ही कोई मिल सके।समाज को जितनी आवश्यकता विजेताओं की होती है , उतनी ही आवश्यकता उत्तम मार्गदर्शन की भी होती हैं।

आमतौर पर समाज में सबसे ज्यादा आलोचना कुछ विशेष प्रकार के व्यक्तियों द्वारा ही कि जाती है। पहले जो रूढ़िवादी होते हैं जिन्हें परिवर्तन इतनी सरलता से सहन नही हो पाते है।

दूसरे ऐसे व्यक्ति जिन्हें लगता है कि किसी फला व्यक्ति के कुछ अलग सोचने से कही समाज में उसकी स्थिति खतरे में तो नही पड़ जाएगी ।

तीसरे वो जो समय रहते खुद कुछ न कर पाए हो परंतु उन्हें बाद में इसका अत्यंत अधिक अफसोस हो वो भी किसी व्यक्ति के प्रयास को सरलता से सहन नही कर पाते हैं; और भी अन्य प्रकार के आलोचक होते हैं।

यहाँ यह जानना भी आवश्यक होगा कि समाज मे केवल नकारात्मक आलोचक ही नही होते बल्कि सकारात्मक आलोचक भी होते हैं । नकारात्मक आलोचक उन्हें कह सकते है जो किसी भी प्रयास का विरोध केवल अपने स्वार्थ या संकुचित मानसिकता के आधार पर करते हैं । सकारात्मक आलोचक समाज या कहे कि किसी व्यक्ति की ज़िंदगी में परिवर्तन देखन चाहते है। वो आलोचना समाज में कमियों को दूर करने के लिए कर रहे होते हैं न कि परिवर्तन का विरोध करने हेतु। वो व्यक्ति को उसके प्रयास में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए सही दिशा में बढ़ने के लिए भी प्रेरित करते हैं।

परन्तु किसी भी ऐसे व्यक्ति को समाज में माफ़ नहीं किया जाना चाहिए जो केवल अपने स्वार्थ के लिए दुसरो की सफलता को सहन नहीं कर सकते हैं ; और दिन प्रतिदिन प्रयासरत व्यक्ति के हौसले को तोड़ने का हर संभव प्रयास करते रहते है।

वास्तव में तो ऐसे नकारात्मक और स्वार्थी व्यक्तियों के लिए समाज में कुछ कठोर नियम कानून अवश्य होने चाहिए क्योंकि ये लोग व्यक्ति को हतोत्साहित करके सामाजिक परिवर्तन की अनेक संभावनाओं का अंत कर देते हैं।

Reasons Why Experience Is Important In Hindi ? Why Experience Is Important In Hindi

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